ज़िन्दगी ...
ज़िन्दगी ने धोखा दिया ,
कुछ दे कर कितना कुछ ले लिया,
फिर भी न था कोई गम,
साथ अपने था खुदा का करम,
सहे हमने कितने सितम,
आई न हमपे उससे रेहेम |
जिंदगी ने ये भी होसला तोडा,
हमको यारों कहीं का ना छोडा,
गम मे डूबे रहे रात भर,
के आते न ये गम अगर,
तो कितना सुहाना होता ज़िन्दगी का सफर,
मारे मारे न फिरते इधर उधर |
फिर एक दिन कुछ सोच कर ,
गम के आँसू पोछ कर,
सोचा ज़िन्दगी कभी तो रंग लाएगी,
आज ना सही कल तो हमे गले लगायेगी,
दिल में जागी नयी उमंग,
ज़िन्दगी फिर जीने लगे हम |
अब कामयाबी कदम है चूमती,
ज़िन्दगी हमारे इशारे पर है घुमती,
नहीं बचा कोई मुकामं,
जहाँ ना हो हमारा निशाँ,
उसे भुला दिया जो मिला नहीं,
ज़िन्दगी से अब कोई गिला नहीं |
~ वर्तिका
Friday, April 24, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)